सुशांत तुमने किया क्यों ऐसा? “एक आघात”

सुशांत तुमने किया क्यों ऐसा, तुमसे तो ऐसी आशा न थी,रात दिन कर तुमने मेहनत, फिर जीवन में निराशा क्या

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लॉकडाउन पर आधारित दो लघु कवितायें !!

सूरज रे! सूरज रे! बन चन्दा मामा,बन्द भी कर अग्नि बरसाना,देख सड़क पर मजदूरों को,नंगे – पैर पड़ रहा है

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मजबूर मजदूर! मजदूरों का हाल तो देखो बाँधे अंगोछा पेट से ! एक भावनात्मक कविता (वीडियो)

सौजन्य से: वैष्णवी प्रोडक्शन हाउस लॉक डाउन में सबसे ज्यादा परेशानी और तकलीफें झेली है प्रवासी मजदूरों न। लॉक डाउन

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