कोरोना के चलते कैसे मनाये छठ, देखे छठ मैया गीत – श्रीयनशु कुमार श्रीवास्तव (बक्सर, बिहार)

इस बार छठ पर्व 18 नवंबर से 20 नवंबर 2020 के मध्य मनाया जाएगा। छठ पूजा में सूर्य देव और छठी मैया की पूजा का प्रचलन और उन्हें अर्घ्य देने का विधान है। आओ जानते हैं कि सार्वजनिक स्थान पर कोरोना के बढ़ते खतरे के चलते घर पर ही छठ कैसे मनाएं।

छठ के पहले दिन नहाय खाय के समय तो घर पर ही साफ सफाई करके पूजा की जाती है और एक समय शाकाहरी सात्विक भोजन किया जाता है तो इस दिन तो बाहर निकलने के जरूरत नहीं। ऐसे में घर के ईशान या उत्तर के कोने में गन्ना और केले के पत्तों का एक मंडप बना लें। मंडप को फूलों से सजा लें। इस मंडप के बीचोंबीच एक पाट स्थापित करके उस पर पीले रंग का कपड़ा बिछा लें और इस पर सूर्यदेव और छठी मईया की एक मूर्ति स्थापित कर दें। दोनों की विधिवत रूप से पूजा कर लें।

दूसरे दिन खरना अर्थात पूरे दिन उपवास रखते हैं और शाम को गुड़ की खीर, घी लगी हुई रोटी और फलों का सेवन करते हैं। इस पूरे दिन जल भी ग्रहण नहीं किया जाता है। संध्या को जो खाया जाता है उसे घर के अन्य सदस्यों को प्रसाद रूप में दिया जाता है।

छठ का तीसरा दिन महत्वपूर्ण होता है। इस दिन सूर्य को संध्या के समय अर्घ्य देकर उनकी पूजा करते हैं। इसके लिए आप खुले मैदान में या घर की छत या बालकनी में एक बड़े टब में पानी भरकर खड़े हो जाएं और सूर्य को अर्घ्य देकर अपनी पूजा संपन्न कर सकते हैं। सूर्य भगवान को अर्घ्य देते समय ध्यान रहें कि सूर्य की किरणों का प्रतिबिंब पानी में दिखनी चाहिए। इसी दौरान सूर्य को जल एवं दूध चढ़ाकर प्रसाद भरे सूप से छठी मैया की पूजा भी की जाती है। बाद में रात्रि को छठी माता के गीत गाए जाते हैं और व्रत कथा सुनी जाती है।

इसी तरह अगले दिन जब छठ पर्व का समापन होता है तो प्रातरू काल भी सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत पारण होता है तो दूसरे ‍दिन भी ऐसा ही करें।

शुभ मुहुर्त: पहला दिन : नहाय-खाय के दिन सूर्योदय सुबह 06:46 बजे और सूर्यास्त शाम को 05:26 बजे पर होगा।

दूसरा दिन : लोहंडा और खरना लोहंडा के दिन सूर्योदय सुबह 06:47 बजे पर होगा और सूर्यास्त शाम को 05:26 बजे पर होगा।

तीसरा दिन- छठ पूजा (सन्ध्या अर्घ्य) के दिन शाम को सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है इस वर्ष छठ पूजा 20 नवंबर को है। इस दिन सूर्यादय 06:48 बजे पर होगा और सूर्योस्त 05:26 बजे पर होगा।

छठ पूजा के लिए षष्ठी तिथि का प्रारम्भ 19 नवंबर को रात 09:59 बजे से हो रहा है, जो 20 नवंबर को रात 09:29 बजे तक है।

चैथा दिन- सूर्योदय अर्घ्य (पारण का दिन) इस दिन सूर्योदय के समय सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया जाता है। उसके बाद पारण कर व्रत को पूरा किया जाता है।

इस वर्ष छठ पूजा का सूर्योदय अर्घ्य तथा पारण 21 नवंबर को होगा इस दिन सूर्योदय सुबह 06:49 बजे तथा सूर्योस्त शाम को 05:25 बजे होगा।

संध्या सूर्य अर्घ्य: 20 नवंबर, दिन शुक्रवार, सूर्योदयरू 06:48 बजे और सूर्यास्तरू 05:26 बजे।

कैसे करें छठ का व्रत रू कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को नहाय खाय से शुरू होने वाले व्रत के दौरान छठव्रती स्नान एवं पूजा पाठ के बाद शुद्ध अरवा चावल, चने की दाल और कद्दू की सब्जी ग्रहण करते हैं। पंचमी को दिन भर खरना का व्रत रखकर व्रती शाम को गुड़ से बनी खीर, रोटी और फल का सेवन करते हैं। इसके बाद शुरू होता है 36 घंटे का निर्जला  व्रत। छठ महापर्व के तीसरे दिन शाम को व्रती डूबते सूर्य की आराधना करते हैं और अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देते हैं। पूजा के चैथे दिन व्रतधारी उदीयमान सूर्य को दूसरा अर्घ्य समर्पित करते हैं। इसके पश्चात 36 घंटे का व्रत समाप्त होता है और व्रती अन्न जल ग्रहण करते हैं।

– रोहित अस्थाना, सूर्याटाइम्स

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