सुशांत तुमने किया क्यों ऐसा? “एक आघात”

सुशांत तुमने किया क्यों ऐसा, तुमसे तो ऐसी आशा न थी,
रात दिन कर तुमने मेहनत, फिर जीवन में निराशा क्या थी।
रिश्ते पवित्र बनाकर तुम, सारे रिश्ते तोड़ गए,
बाप, बहन, बाकी रिश्तों को भी, जीवन में अकेला छोड़ गए।
संघर्ष किया था तुमने कितना, पायी थी जीवन में कामयाबी,
फिर क्यों तुमने किया ऐसा, क्या छा गयी थी गुमनामी।
सबकी आँखों के तारे तुम, प्यार सभी तुम पर लुटाते थे,
किसी के धोनी, किसी के अन्नी, सबके प्यारे दुलारे थे।
जीना था तुम्हें और भी, संघर्ष करके जीवन में,
पिता का संघर्ष भी याद करते, जो किया था उन्होंने जीवन में।
दुनिया को देकर सन्देश, आत्महत्या कोई उपाय नहीं,
और खुद ही ये कदम, जीवन में उठा गए तुम।
खैर अब तुम चले गए, बस यादें ही रह गयी यहाँ,
तुम रहना खुश उस दुनिया में, वो माँ की छाया मिलें जहाँ।

– निशा श्रीवास्तव (अस्थाना), आगरा (उत्तर प्रदेश)

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